देशहरियाणा

कर्नल रामेश्वर : एक सैनिक से कर्नल तक की प्रेरणादायक यात्रा

जे.पी. यादव
गुरुग्राम : सात जुलाई 1969 को हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शेखुपुर माजरी गाँव में जन्मे कर्नल रामेश्वर एक प्रतिष्ठित सैन्य परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता, स्वर्गीय श्री हीरा सिंह ने कुमाऊँ रेजिमेंट की विभिन्न यूनिटों में तथा बड़े भाई, स्वर्गीय श्री बिक्रम सिंह ने 13वीं कुमाऊँ बटालियन में गौरवपूर्ण सैन्य सेवा प्रदान की। इसी सैन्य परंपरा से प्रेरित होकर उन्होंने अक्टूबर 1985 में कुमाऊँ रेजिमेंट में एक सैनिक के रूप में सैन्य जीवन प्रारंभ किया। बाद में उनके पदचिह्नों पर चलते हुए उनके छोटे भाई श्री महीपाल सिंह ने भी 19वीं कुमाऊँ बटालियन में सेवा प्रदान की।
प्रशिक्षण के उपरांत उनकी नियुक्ति 18 कुमाऊँ बटालियन में हुई। अपनी सैनिक सेवा के दौरान उन्होंने ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन हिफाज़त तथा ऑपरेशन पराक्रम सहित विभिन्न फील्ड एवं ऑपरेशनल क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएँ प्रदान कीं। इसी दौरान सेलेक्शन सेंटर, बेंगलुरु द्वारा उनका स्पेशल लिस्ट (SL) कमीशन हेतु चयन किया गया। स्पेशल लिस्ट कमीशन प्राप्त करने के उपरांत उन्होंने सिख रेजिमेंट की 10वीं बटालियन के साथ जम्मू-कश्मीर में एक वर्ष का इन्फैंट्री अटैचमेंट पूर्ण किया तथा ऑपरेशन रक्षक में सक्रिय सेवाएँ दीं। इसके पश्चात उन्होंने भारतीय सेना के नौ विभिन्न रिकॉर्ड कार्यालयों में महत्वपूर्ण दायित्व निभाए तथा महार रेजिमेंट रिकॉर्ड्स, एमईजी रिकॉर्ड्स और आर्मी एयर डिफेंस रिकॉर्ड्स में कमांडिंग ऑफिसर के रूप में नेतृत्व करने का विशिष्ट गौरव प्राप्त किया। उनकी उत्कृष्ट एवं समर्पित सेवाओं के लिए 15 अगस्त 2010 को उन्हें मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कुमाऊँ रेजिमेंट के स्पेशल लिस्ट अधिकारियों में कर्नल रामेश्वर एकमात्र अधिकारी हैं जिन्होंने कर्नल के पद तक पहुँचने का गौरव अर्जित किया। 31 जुलाई 2026 को उन्होंने 40 वर्ष 9 माह की गौरवपूर्ण सैन्य सेवा के उपरांत सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्ति ग्रहण की। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सरोज देवी एक समर्पित गृहिणी हैं। उनके पुत्र श्री विनोद यादव विधि स्नातक (अधिवक्ता) हैं तथा हिमाचल प्रदेश के बीड़ में पर्यटन व्यवसाय का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं। उनकी पुत्री सुश्री ललिता यादव आर्मी पब्लिक स्कूल, गोपालपुर (ओडिशा) में अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। एक सैनिक से कर्नल तक की उनकी प्रेरणादायक यात्रा समर्पण, अनुशासन, उत्कृष्ट नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा और अटूट संकल्प का अनुपम उदाहरण है। उनका जीवन इस सत्य का साक्षात प्रमाण है कि निष्ठा, कठिन परिश्रम और उत्कृष्ट कर्म के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। वे भारतीय सेना के प्रत्येक सैनिक, युवा अधिकारी तथा भावी पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।